उर्दू शायरी · ग़ज़ल

the kabhi hum ko bhi hangame aziz

थे कभी हम को भी हंगामे 'अज़ीज़

تھے کبھی ہم کو بھی ہنگامے عزیز

शायर: Madhu Madhuman8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

थे कभी हम को भी हंगामे 'अज़ीज़
अब मगर लगते हैं सन्नाटे 'अज़ीज़

जो हमें हैं जान के जैसे 'अज़ीज़
काश होते हम भी यूँ उन के 'अज़ीज़

ज़िंदगी महफ़ूज़ हो जिन के तले
किस क़दर होते हैं वो साए 'अज़ीज़

जिन से हैं मंसूब यादें आप की
हम को हैं वो सब गली कूचे 'अज़ीज़

ज़िंदगी कटती नहीं उन के बिना
लोग कुछ होते हैं क्यों इतने 'अज़ीज़

दिल को छू जाते थे जो भीतर तलक
आज भी हैं हम को वो नग़्मे 'अज़ीज़

जाम ख़ुशियों के मुबारक आप को
हम को तो हैं ग़म के पैमाने 'अज़ीज़

अहल-ए-दुनिया को हैं प्यारी मंज़िलें
और 'मधुमन' हम को हैं रस्ते 'अज़ीज़