उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chaman se KHushbuon ka istiara le gaya koi

चमन से ख़ुशबुओं का इस्ति'आरा ले गया कोई

چمن سے خوشبوؤں کا استعارہ لے گیا کوئی

शायर: Madhu Madhuman7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चमन से ख़ुशबुओं का इस्ति'आरा ले गया कोई
हमारे गुल्सिताँ से रंग सारा ले गया कोई

हमें जो राह दिखलाता था जीवन के अँधेरों में
हमारे आसमाँ से वो सितारा ले गया कोई

बहुत वीरान रहता है फ़लक आँखों का ये जब से
चुरा कर उस से उस का माह-पारा ले गया कोई

भला अब ज़िंदगी में देखने को क्या रहा बाक़ी
जो भाता था हमें वो हर नज़ारा ले गया कोई

लगेगी पार कैसे नाव अब ये ख़ुदा जाने
उसे मंजधार में रख कर किनारा ले गया कोई

बदल देता था जो मेंडक को इक राजा की सूरत में
जहाँ से अब वो जादू का पिटारा ले गया कोई

दिल-ए-बेताब को 'मधुमन' क़रार आए भी तो कैसे
सुकूँ तो छीन कर हम से हमारा ले गया कोई