उर्दू शायरी · ग़ज़ल

Thahre jazbaat ke dariya ko rawani de kar

ठहरे जज़्बात के दरिया को रवानी दे कर

ٹھہرے جذبات کے دریا کو روانی دے کر

शायर: Varun Gagneja Wahid5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ठहरे जज़्बात के दरिया को रवानी दे कर
हम ने किरदार बचाया है कहानी दे कर

हद से बढ़ जाए तो हर चीज़ बुरी होती है
मैं ने इक फ़स्ल जला डाली है पानी दे कर

इस नए लहजे से दिल डूबने लगता है मिरा
तुम पुकारो मुझे आवाज़ पुरानी दे कर

अब मुझे प्यास निभाने का हुनर आता है
ख़ाक सहरा में उड़ाई है जवानी दे कर

मेरा रब करता है एहसान मुसलसल 'वाहिद'
शेर-दर-शेर मुझे मिस्रा-ए-सानी दे कर