उर्दू शायरी · ग़ज़ल

qalam se nikle ya mere KHayal se nikle

क़लम से निकले या मेरे ख़याल से निकले

قلم سے نکلے یا میرے خیال سے نکلے

शायर: Varun Gagneja Wahid4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क़लम से निकले या मेरे ख़याल से निकले
कोई जवाब तो अब इस सवाल से निकले

बहुत कठिन था बुलंदी पे इतना रह पाना
ख़ुदा का शुक्र कि हम इस कमाल से निकले

मिरे हुनर पे बहुत क़र्ज़ है तिरा हमदम
तमाम शे'र तुम्हारे ख़याल से निकले

मैं और इस से ज़ियादा भी क्या गिरूँ 'वाहिद'
कोई उरूज तो अब इस ज़वाल से निकले