उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tere pahlu ya darmiyan nikle

तेरे पहलू या दरमियाँ निकले

تیرے پہلو یا درمیاں نکلے

शायर: Vikas Rana4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तेरे पहलू या दरमियाँ निकले
एक जाँ है कहाँ कहाँ निकले

इस तरह से कभी समेट मुझे
मेरे खुलने पर इक जहाँ निकले

सोचता हूँ यूँ न हो इक दिन
ये ज़मीं कोई आसमाँ निकले

आ तिरी साँस साँस पी लूँ मैं
जिस्म से रूह का धुआँ निकले