उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tere lahje teri baaton mein koi aur bhi tha

तेरे लहजे तिरी बातों में कोई और भी था

تیرے لہجے تری باتوں میں کوئی اور بھی تھا

शायर: Faisal Imam Rizvi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तेरे लहजे तिरी बातों में कोई और भी था
यूँ तिरे चाहने वालों में कोई और भी था

मैं तो शर्मिंदा हूँ उस रोज़ से बिस्तर से तिरे
जब से जाना तिरे ख़्वाबों में कोई और भी था

यूँ मुझे टूट के मत चाहो कि मैं जानता हूँ
मुझ से पहले तिरी बाँहों में कोई और भी था

अजनबी शहर की सड़कों पे मरा हूँ बे-शक
जान-लेवा मिरी राहों में कोई और भी था

गो कि महफ़िल में उन्हें हम से है मतलब लेकिन
उन की बे-ताब निगाहों में कोई और भी था

वो जो रोए थे गले लग के हमारे 'फ़ैसल'
उन के बहते हुए अश्कों में कोई और भी था