उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kisi ki zulf kisi ke labon ko chaha tha

किसी की ज़ुल्फ़ किसी के लबों को चाहा था

کسی کی زلف کسی کے لبوں کو چاہا تھا

शायर: Faisal Imam Rizvi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

किसी की ज़ुल्फ़ किसी के लबों को चाहा था
फ़रेब देती हुई सूरतों को चाहा था

है उस के दिल में भी इक आइना सा टूटा हुआ
और उस को याद है किन पत्थरों को चाहा था

वो बारिशें वो हवाएँ वो बादलों के हुजूम
किसी के प्यार में सब मौसमों को चाहा था

उदास करते हुए रास्तों ने पूछा है
कहाँ गए हैं वो जिन दोस्तों को चाहा था

ख़ुद अपने हाल पे हम दोनों हंस पड़े 'फ़ैसल'
कि हम ने अपने सिवा दूसरों को चाहा था