उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kis ne is dasht mein ghar-bar luTana hai miyan

किस ने इस दश्त में घर-बार लुटाना है मियाँ

کس نے اس دشت میں گھر بار لٹانا ہے میاں

शायर: Faisal Imam Rizvi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

किस ने इस दश्त में घर-बार लुटाना है मियाँ
ऐसे वीराने को हम ने ही सजाना है मियाँ

आप से किस ने कहा आप भी बारिश माँगें
आप का काम फ़क़त आग लगाना है मियाँ

इन भड़कते हुए जज़्बात पे क़ाबू रखिए
हम ने इस्टेज पे कुछ और दिखाना है मियाँ

दोस्ती होती तो फिर सब को बताते फिरते
ये मोहब्बत है इसे सब से छुपाना है मियाँ

न मुनाफ़िक़ हो न आती है ख़ुशामद तुम को
तुम ने क्या ख़ाक यहाँ नाम कमाना है मियाँ

आप से कौन करे बहस सर-ए-बज़्म-ए-रक़ीब
आप ने हम पे ही इल्ज़ाम लगाना है मियाँ

आओ सर रख लो बड़ा चैन मिलेगा 'फ़ैसल'
ये तवाइफ़ का नहीं यार का शाना है मियाँ