उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tere daman ki thi ya mast hua kis ki thi

तेरे दामन की थी या मस्त हुआ किस की थी

تیرے دامن کی تھی یا مست ہوا کس کی تھی

शायर: Ejaz Obaid6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तेरे दामन की थी या मस्त हुआ किस की थी
साथ मेरे चली आई वो सदा किस की थी

कौन मुजरिम है कि दूरी है वही पहली सी
पास आ कर चले जाने की अदा किस की थी

दिल तो सुलगा था मगर आँखों में आँसू क्यूँ आए
मिल गई किस को सज़ा और ख़ता किस की थी

शाम आते ही उतर आए मिरे गाँव में रंग
जिस के ये रंग थे जाने वो क़बा किस की थी

ये मिरा दिल है कि आँखें कि सितारों की तरह
जलने बुझने की सहर तक ये अदा किस की थी

चाँदनी रात घने नीम तले कोई न था
फिर फ़ज़ाओं में वो ख़ुशबू-ए-हिना किस की थी