उर्दू शायरी · ग़ज़ल

taur be-taur hue jate hain

तौर बे-तौर हुए जाते हैं

طور بے طور ہوئے جاتے ہیں

शायर: Habeeb Ashar Dehlavi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तौर बे-तौर हुए जाते हैं
अब वो कुछ और हुए जाते हैं

छलकी पड़ती है निगाह-ए-साक़ी
दौर पर दौर हुए जाते हैं

तू न घबरा कि तिरे दीवाने
ख़ूगर-ए-जौर हुए जाते हैं

इश्क़ के मसअला-हा-ए-सादा
क़ाबिल-ए-ग़ौर हुए जाते हैं