उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jo mere dil mein aah ho ke rahi

जो मिरे दिल में आह हो के रही

جو مرے دل میں آہ ہو کے رہی

शायर: Habeeb Ashar Dehlavi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जो मिरे दिल में आह हो के रही
वो नज़र बे-पनाह हो के रही

मैं हूँ और तोहमत-ए-ज़बूनी-ए-दिल
बे-गुनाही गुनाह हो के रही

ख़लिश-ए-दिल पे कुछ भरोसा था
वो भी तेरी निगाह हो के रही

दिल की इशरत-पसंदियाँ तौबा
हर तमन्ना गुनाह हो के रही