उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tasawwuraat ki duniya basa raha hun main

तसव्वुरात की दुनिया बसा रहा हूँ मैं

تصورات کی دنیا بسا رہا ہوں میں

शायर: Urooj Qadri8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तसव्वुरात की दुनिया बसा रहा हूँ मैं
तिरे ख़याल से तस्कीन पा रहा हूँ मैं

ख़याल-ओ-वहम से ऊँची बहुत है तेरी ज़ात
तिरी सिफ़ात का नक़्शा जमा रहा हूँ मैं

मिरा वजूद भी परतव है तेरी हस्ती का
दिल-ए-हज़ीं में तिरा नूर पा रहा हूँ मैं

ये कौन है कि मअय्यत का लुत्फ़ हासिल है
तमाम आलम-ए-इम्काँ पे छा रहा हूँ मैं

तिरे करम की निहायत नहीं मिरे मालिक
कि मुश्त-ए-ख़ाक को कुंदन बना रहा हूँ मैं

जिलौ में जिस की हो अम्न-ओ-सुकूँ की गुल-पाशी
वो इंक़लाब ज़माने में ला रहा हूँ मैं

तिरे कलाम-ए-मुक़द्दस से रौशनी ले कर
अँधेरी रात में शमएँ जला रहा हूँ मैं

मिरी बिसात ही क्या है जहाँ के रखवाले
तिरे सहारे पे हिम्मत दिखा रहा हूँ मैं