उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tasalsul se guman likkha gaya hai

तसलसुल से गुमाँ लिक्खा गया है

تسلسل سے گماں لکھا گیا ہے

शायर: Daniyal Tareer6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तसलसुल से गुमाँ लिक्खा गया है
यक़ीं तो ना-गहाँ लिक्खा गया है

मुकम्मल हो चुकी क़िरअत फ़ज़ा की
परिंदे और धुआँ लिक्खा गया है

मिरा दो पल ठहर कर साँस लेना
सर-ए-आब-ए-रवाँ लिक्खा गया है

उगाएगी सितारे अब ये मिट्टी
ज़मीं पर आसमाँ लिक्खा गया है

किताब-ए-ग़ैब पढ़ता जा रहा हूँ
मिरा होना कहाँ लिक्खा गया है

नहीं लिक्खा गया काग़ज़ पे कुछ भी
फ़क़त आइंदगाँ लिक्खा गया है