उर्दू शायरी · ग़ज़ल

badan par Tank kar tare uDaya ja raha hai

बदन पर टाँक कर तारे उड़ाया जा रहा है

بدن پر ٹانک کر تارے اڑایا جا رہا ہے

शायर: Daniyal Tareer7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बदन पर टाँक कर तारे उड़ाया जा रहा है
मुझे आख़िर परिंदा क्यों बनाया जा रहा है

जहाँ पर ख़त्म होती है समय की राजधानी
बदन ठहरा हुआ है और साया जा रहा है

मैं सोया भी नहीं हूँ और सपना देखता हूँ
ज़मीं को आसमानों पर बिछाया जा रहा है

नज़र आती नहीं है बोलने वाले की सूरत
सुनाई दे रहा है जो सुनाया जा रहा है

अचानक इस सदा से काँप उठती हैं ज़मीनें
सँभल जाओ पहाड़ों को हिलाया जा रहा है

मुझे मिट्टी का चेहरा और आँखें दे के भेजा
कहा ये सब्र तेरा आज़माया जा रहा है

कहानी ख़त्म होने की निशानी है ये लम्हा
दु'आ को ज़र्द पत्तों में छुपाया जा रहा है