उर्दू शायरी · ग़ज़ल

taqdir-e-wafa ka phuT jaana

तक़दीर-ए-वफ़ा का फूट जाना

تقدیر وفا کا پھوٹ جانا

शायर: Iftikhar Raghib7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तक़दीर-ए-वफ़ा का फूट जाना
मैं भूला न दिल का टूट जाना

क्या देता रहेगा दिल पे दस्तक
इक जुमला जो मैं ने झूट जाना

इक सूरत उतारना ग़ज़ल में
लफ़्ज़ों का पसीना छूट जाना

क्या रोऊँ तुझे ऐ ध्यान-दर्पण
पल भर में है तुझ को टूट जाना

किस दर्जा सुरूर-बख़्श था वो
उस कूचे में झूट-मूट जाना

रुक जाएगा साथ धड़कनों के
ख़ामोशी का टूट-फूट जाना

वो आना किसी का दिल में 'राग़िब'
और सब्र-ओ-क़रार लूट जाना