उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tanhai se jab ukta ke baiTh gaya

तन्हाई से जब उक्ता के बैठ गया

تنہائی سے جب اکتا کے بیٹھ گیا

शायर: Vijay Rahi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तन्हाई से जब उक्ता के बैठ गया
मैं फिर मयख़ाने में आ के बैठ गया

पत्थर को पत्थर ही अच्छे लगते हैं
सो अपने तबक़े में जा के बैठ गया

आज गली से मैं ने देखा था उस को
चंदा छत पर ही शर्मा के बैठ गया

साँझ ढली तो हम भी अपने घर आए
साया पास हमारे आ के बैठ गया

आख़िर एक चराग़ ने ऐसी क्या ठानी
देखो आगे आज हवा के बैठ गया

लोगों ने पूछा जब उस के बारे में
'राही' अपनी नज़्म सुना के बैठ गया