उर्दू शायरी · ग़ज़ल

maghruri mein kis ko kis ka dhyan raha

मग़रूरी में किस को किस का ध्यान रहा

مغروری میں کس کو کس کا دھیان رہا

शायर: Vijay Rahi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मग़रूरी में किस को किस का ध्यान रहा
दरिया भी अपने को सागर मान रहा

जब टूटा था थोड़े दिन बे-जान रहा
फिर भी दिल तो दिल है दिल नादान रहा

मेरा क़ातिल मेरे अंदर था लेकिन
मरते दम तक मैं उस से अंजान रहा

दुख ने ही जीवन भर साथ दिया मेरा
सुख तो केवल दो दिन का मेहमान रहा

वो भी मुझ को दो दिन में ही भूल गया
मेरा भी आगे रस्ता आसान रहा