उर्दू शायरी · ग़ज़ल

purane Thanw se rahti hai lipTi

पुराने ठाँव से रहती है लिपटी

پرانے ٹھاؤں سے رہتی ہے لپٹی

शायर: Vijay Rahi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

पुराने ठाँव से रहती है लिपटी
ग़रीबी गाँव से रहती है लिपटी

हमारे खेत की मिट्टी है साहिब
हमेशा पाँव से रहती है लिपटी

उसे पानी से नफ़रत हो गई क्या
ये मछली नाँव से रहती है लिपटी

वो मेरी जान है 'राही' जो मेरे
बदन की छाँव से रहती है लिपटी