उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tamam umr zaban se yahi to kaam liya

तमाम 'उम्र ज़बाँ से यही तो काम लिया

تمام عمر زباں سے یہی تو کام لیا

शायर: Raft Bahraichi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तमाम 'उम्र ज़बाँ से यही तो काम लिया
तुम्हारा नाम लिया या ख़ुदा का नाम लिया

मिरी ज़बाँ ने ख़ुदाया ये किस का नाम लिया
जो मुझ को मेरे तहम्मुल ने बढ़ के थाम लिया

सुला दिया उन्हें जागे थे जो शब-ए-ग़म के
अजल ने अपने ही हाथों ये नेक काम लिया

जो ज़र्फ़ रखते हैं आ'ला वो बादा-कश हम हैं
कभी न दौर में साक़ी से उठ के जाम लिया

निकल चुकी थी मिरे दिल से आह-ए-आलम-सोज़
ये कहिये ख़ैर हुई ज़ब्त ने जो थाम लिया

वो कौन है ये हमें भी बताओ ऐ 'राफ़त'
ये चुपके-चुपके अभी जिस का तुम ने नाम लिया