उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tamam shahr mein hai aam karobar-e-hawas

तमाम शहर में है आम कारोबार-ए-हवस

تمام شہر میں ہے عام کاروبار ہوس

शायर: Raeesuddin Raees5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तमाम शहर में है आम कारोबार-ए-हवस
कि चेहरे चेहरे पे चस्पाँ है इश्तिहार-ए-हवस

अभी रगों में है तल्ख़ी-ए-ए'तिबार-ए-हवस
बदन में टूट रहा है अभी ख़ुमार-ए-हवस

जो चल पड़े हो तो अंजाम-ए-गुमरही से डरो
सुपुर्द-ए-ख़ाक न कर दे ये रहगुज़ार-ए-हवस

हवा है गर्म न कमरे की खिड़कियाँ खोलो
न जाने शहर में ठहरे कहाँ ग़ुबार-ए-हवस

फ़रार ख़्वाहिश-ए-हस्ती से जब नहीं मुमकिन
नफ़स की क़ैद कहें या इसे हिसार-ए-हवस