उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hawa namnak hoti ja rahi hai

हवा नमनाक होती जा रही है

ہوا نمناک ہوتی جا رہی ہے

शायर: Raeesuddin Raees8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हवा नमनाक होती जा रही है
हवेली ख़ाक होती जा रही है

दरीचा खोलते ही थम गई है
हवा चालाक होती जा रही है

हमारे हौसलों के आगे मुश्किल
ख़स ओ ख़ाशाक होती जा रही है

लहू के हाथ धोए जा रहे हैं
नदी नापाक होती जा रही है

नई तहज़ीब से ये नस्ल-ए-नौ अब
बहुत बेबाक होती जा रही है

समुंदर थाम ले मौजों को अपनी
ज़मीं तैराक होती जा रही है

मोहब्बत नफ़रतों के बीच पल कर
बड़ी सफ़्फ़ाक होती जा रही है

ब-फ़ैज़-ए-शाइरी शहर-ए-हुनर में
हमारी धाक होती जा रही है