उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hua shuur to KHud-agahi ke par nikle

हुआ शु'ऊर तो ख़ुद-आगही के पर निकले

ہوا شعور تو خود آگہی کے پر نکلے

शायर: Raeesuddin Raees5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हुआ शु'ऊर तो ख़ुद-आगही के पर निकले
फ़सील-ए-ज़ात में ख़ुश-फ़हमियों के दर निकले

मैं अपने क़त्ल का इल्ज़ाम किस के सर रखता
जब अपने हाथ ही अपने लहू में तर निकले

तिरी तलाश में अक्सर सफ़ीर यादों के
रिदा-ए-ख़्वाब सर-ए-शाम ओढ़ कर निकले

हुईं दराज़ जो मेहर-ए-सहर की शमशीरें
तमाम जिस्मों के साए बुरीदा-सर निकले

जिन्हें तलाश थी शादाब-ओ-सब्ज़ मौसम की
उन्हीं की राह में सूखे हुए शजर निकले