उर्दू शायरी · ग़ज़ल

roz ek KHwab-e-musalsal aur main

रोज़ इक ख़्वाब-ए-मुसलसल और मैं

روز اک خواب مسلسل اور میں

शायर: Raeesuddin Raees6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रोज़ इक ख़्वाब-ए-मुसलसल और मैं
रात भर यादों का जंगल और मैं

हाथ कोई भी सहारे को नहीं
पाँव के नीचे है दलदल और मैं

सोचता हूँ शब गुज़ारूँ अब कहाँ
घर का दरवाज़ा मुक़फ़्फ़ल और मैं

हर क़दम तारीकियाँ हैं हम-रिकाब
अब कोई जुगनू न मिशअल और मैं

है हर इक पल ख़ौफ़ रक़्साँ मौत का
चार-सू है शोर-ए-मक़्तल और मैं

शेर कहना अब 'रईस' आसाँ नहीं
सामने इक चेहरा मोहमल और मैं