उर्दू शायरी · ग़ज़ल

band hai aaj bhi tarsil pe rah-e-alfaz

बंद है आज भी तर्सील पे राह-ए-अल्फ़ाज़

بند ہے آج بھی ترسیل پہ راہ الفاظ

शायर: Raeesuddin Raees6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बंद है आज भी तर्सील पे राह-ए-अल्फ़ाज़
मैं कि मज़मून हूँ फिर भी हूँ तबाह-ए-अल्फ़ाज़

आज औराक़-नवर्दी है मुक़द्दर लेकिन
कल मोअर्रिख़ मुझे ठहराएगा शाह-ए-अलफ़ाज़

काश मफ़हूम-गज़ीदा कोई पत्थर ही मिले
संग-ज़ारों में भटकती है निगाह-ए-अल्फ़ाज़

लोग समझेंगे न जानेंगे मिरी बात मगर
मेरे सर आएगा फिर भी ये गुनाह-ए-अल्फ़ाज़

हूँ वो मफ़्हूम जो शर्मिंदा-ए-तहरीर नहीं
है पनाहों में मिरी ख़ुद ही पनाह-ए-अल्फ़ाज़

बर-सर-ए-जंग हूँ तर्सील के मैदाँ में 'रईस'
क़ैद-ए-इबहाम में है फिर भी सबाह-ए-अल्फ़ाज़