उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tamam fitnon se KHud ko bacha liya maine

तमाम फ़ित्नों से ख़ुद को बचा लिया मैं ने

تمام فتنوں سے خود کو بچا لیا میں نے

शायर: Aalam Nizami7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तमाम फ़ित्नों से ख़ुद को बचा लिया मैं ने
मुनाफ़िक़ीन से पीछा छुड़ा लिया मैं ने

न जाने किस लिए ज़हमत उठा रहे हैं लोग
दराज़ क़द भी जब अपना घटा लिया मैं ने

शनाख़्त हो सके जिस से फ़रेब-कारों की
जनाब-ए-वाला वो चश्मा लगा लिया मैं ने

मिरी अना पे ज़रा भी कहीं जो हर्फ़ आया
तो आसमान को सर पर उठा लिया मैं ने

तुझे मैं तर्क करूँ किस तरह ग़ज़ल-गोई
तुझे तो ज़ीस्त का हिस्सा बना लिया मैं ने

हुए शिकार जो अहबाब बद-गुमानी के
उन्हें भी हुस्न-ए-वफ़ा से मना लिया मैं ने

मसर्रतों से बहुत घुट रहा था दम 'आलम'
ग़म-ए-हयात को अपना बना लिया मैं ने