उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tawil-e-ahd-e-fan hi to wahshat ka hal nahin

तावील-ए-अह्द-ए-फ़न ही तो वहशत का हल नहीं

تاویل عہد فن ہی تو وحشت کا حل نہیں

शायर: Naeem Sameer5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तावील-ए-अह्द-ए-फ़न ही तो वहशत का हल नहीं
पेश-ए-नज़र जुनून है यारो ग़ज़ल नहीं

अब इस के बाद अह्द की तारीक रात है
ये इख़्तिताम-ए-शाम है सुब्ह-ए-अज़ल नहीं

ऐ दोस्त इश्क़ मंसब-ए-फ़हम-ओ-शुऊ'र है
ये इर्तिक़ा है ज़ह्न का कोई ख़लल नहीं

इक उम्र रतजगों की अज़िय्यत में काट दी
अब मेरे ख़्वाब नींद का रद्द-ए-अमल नहीं

क्या क्या अता-ए-ने'मत-ए-रब्ब-ए-करीम है
लेकिन 'समीर' दर्द का नेमुल-बदल नहीं