उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ta-chand uske jaur ke sadme uThae dil

ता-चंद उस के जौर के सदमे उठाए दिल

تا چند اس کے جور کے صدمے اٹھائے دل

शायर: Maharaja Sir Kishan Parashad Shad7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ता-चंद उस के जौर के सदमे उठाए दिल
पत्थर नहीं है सीने में जो ताब लाए दिल

मशहूर उस का हो के मैं बदनाम हो गया
अब रफ़्ता-रफ़्ता देखिए क्या क्या दिखाए दिल

आए अगर वो ग़ैरत-ए-गुल मेरे बाग़ में
दिल-शाद बाग़बान हो और फूल जाए दिल

किस तरह बेवफ़ा पे करे कोई ए'तिबार
किस तरह उस से कोई फिर अपना लगाए दिल

दर-पर्दा अपना काम ये करती है रात-दिन
क़ातिल की तेग़-ए-नाज़ से क्यूँकर बचाए दिल

हम उस से क्या मिले कि बस अपने से खो गए
थी आशिक़ी में उस की यही तो सज़ा-ए-दिल

मैं बेचता हूँ मुफ़्त जो हो मुश्तरी कोई
अर्ज़ां हो इस से 'शाद' कहो क्या बहा-ए-दिल