उर्दू शायरी · ग़ज़ल

surat utar na jae kahin mahtab ki

सूरत उतर न जाए कहीं माहताब की

صورت اتر نہ جائے کہیں ماہتاب کی

शायर: Chander Wahid5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सूरत उतर न जाए कहीं माहताब की
कह दो कि बात झूट है उन के शबाब की

शाम-ए-विसाल सेज पे शरमाए जूँ दुल्हन
शर्माई यूँ हैं शाख़ पे कलियाँ गुलाब की

पत्थर उछाल दीजिए यूँ दिल की झील में
वर्ना उमीद रखिए न मुझ से जवाब की

मंज़िल क़रीब आई तो भटका दिया गया
इन रहबरों ने ज़िंदगी मेरी ख़राब की

हालात ने बिगाड़ दी 'वाहिद' की शक्ल यूँ
जैसे ख़राब जिल्द हो अच्छी किताब की