उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sukun ye apne saweron ka chain rainon ka

सुकूँ ये अपने सवेरों का चैन रैनों का

سکوں یہ اپنے سویروں کا چین رینوں کا

शायर: Parveen Kaif6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सुकूँ ये अपने सवेरों का चैन रैनों का
कोई हिसाब नहीं है ख़ुदा की देनों का

मकान कच्चे थे वा'दे थे पक्के दिल रौशन
ज़माना था वो चराग़ों का लालटेनों का

ये सच है गाँव की रातें ख़मोश होती हैं
मगर वो शोर गुज़रती हुई ट्रेनों का

गले का हार सलीबें हैं सब दिखावे की
यहाँ रिवाज है अब तो तिलाई चेनों का

हलाक होती है मख़्लूक़ और ख़ुदाओं पर
कोई असर ही नहीं शेवनों का बैनों का

वहाँ मुशा'इरे पढ़ने चली हो तुम 'परवीन'
जहाँ है ज़ोर लताओं का तानसेनों का