उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sochta hun ki kya kiya ab tak

सोचता हूँ कि क्या किया अब तक

سوچتا ہوں کہ کیا کیا اب تک

शायर: B.M Khan Maley7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सोचता हूँ कि क्या किया अब तक
जीते रहने से क्या मिला अब तक

एक मुद्दत से जी रहा हूँ बस
कुछ भी हासिल नहीं हुआ अब तक

आज को छोड़ फ़िक्र में कल की
कैसे क्या जाने जी लिया अब तक

सारे लोगों की बातें सुनता रहा
ख़ुद का कहना नहीं सुना अब तक

होश उड़ते हैं जब मियाँ बच्चे
पूछते हैं कि क्या किया अब तक

इक ज़माने से है तलाश मगर
मिल न पाया मुझे ख़ुदा अब तक

दुख तो इस बात का 'म'आले' है
कुछ नहीं ख़ास कर सका अब तक