उर्दू शायरी · ग़ज़ल

koi kya jaane kaun behtar hai

कोई क्या जाने कौन बेहतर है

کوئی کیا جانے کون بہتر ہے

शायर: B.M Khan Maley7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कोई क्या जाने कौन बेहतर है
ये तो इंसान का मुक़द्दर है

जिस के अख़्लाक़ हों बुलंद अरफ़ा
वो ही बेहतर है और बरतर है

टूटना चर्ख़ पर सितारे का
रब की क़ुदरत का एक मज़हर है

दो गज़ी ख़ाक पर खुदा मरक़द
इब्न-ए-आदम का दाइमी घर है

हर तरफ़ ख़ौफ़-ए-मर्ग है तारी
लगता है ये भी कोई महशर है

दुख में आँसू नहीं बहाता दिल
आज-कल बन गया ये पत्थर है

जो कि लिखता है नाम बी एम ख़ाँ
ये 'म'आले' वही तो अहक़र है