उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ai ins KHalifa hai tu KHaqan nahin hai

ऐ इंस ख़लीफ़ा है तू ख़ाक़ान नहीं है

اے انس خلیفہ ہے تو خاقان نہیں ہے

शायर: B.M Khan Maley6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ऐ इंस ख़लीफ़ा है तू ख़ाक़ान नहीं है
तू मेज़बाँ है अर्ज़ पे मेहमान नहीं है

ये बात भी है सच कि ग़लत तर्ज़-ए-अमल से
दुनिया में तिरा जीना अब आसान नहीं है

क्या फ़ाएदा है दुनिया कमाने का ऐ नादाँ
टल जाए अजल ये भी तो इम्कान नहीं है

माहौल बना प्यार-ओ-उख़ुव्वत का ज़मीं पर
तू आ'ला बशर है कोई शैतान नहीं है

तेरा नहीं शेवा है अदाकारी समझ ले
ऐ ख़ाकी नुमाइश का तू सामान नहीं है

पढ़ लिख के 'म'आले' तू बना अपना मुक़द्दर
हाकिम है हक़ीक़त में तू दरबान नहीं है