उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sitam ka KHauf nahin hai alam ki baat nahin

सितम का ख़ौफ़ नहीं है अलम की बात नहीं

ستم کا خوف نہیں ہے الم کی بات نہیں

शायर: Daud Ghazi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सितम का ख़ौफ़ नहीं है अलम की बात नहीं
रह-ए-तलब में किसी पेच-ओ-ख़म की बात नहीं

विसाल-ए-यार की उम्मीद भी अजब शय है
हज़ार ग़म हैं मगर फिर भी ग़म की बात नहीं

चलो कि मिल के मदावा-ए-ग़म करें हम लोग
है सब को एक ही ग़म बेश-ओ-कम की बात नहीं

तुम्हारी ज़ुल्फ़ है मुमकिन है ख़ुद सँवर जाए
तुम्हारी ज़ुल्फ़ में कुछ पेच-ओ-ख़म की बात नहीं

सितमगरों पे इन अश्कों का क्या असर होगा
हयात-ए-जेहद है कुछ चश्म-ए-नम की बात नहीं