उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mizaj-e-alam-e-imkan hai barham dekhiye kya ho

मिज़ाज-ए-आलम-ए-इम्काँ है बरहम देखिए क्या हो

مزاج عالم امکاں ہے برہم دیکھیے کیا ہو

शायर: Daud Ghazi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिज़ाज-ए-आलम-ए-इम्काँ है बरहम देखिए क्या हो
सितम-कश पै-ब-पै होते हैं बाहम देखिए क्या हो

गए वो दिन कि आवाज़ों पे ख़ामोशी का पहरा था
ब-हर सू गूँजता है सोज़-ए-पैहम देखिए क्या हो

ये कैसा रंग-ए-महफ़िल है परेशाँ है बहुत साक़ी
बने बैठे हैं सब मय-ख़्वार हमदम देखिए क्या हो

चमन में रंग लाएगी सबा की आबला-पाई
पिलाती है लहू शाख़ों को शबनम देखिए क्या हो

नज़र टकरा रही है अब शुआ'-ए-मेहर-ए-ताबाँ से
हुई है ख़ुश्क कब की चश्म-ए-पुर-नम देखिए क्या हो

रह-ए-ग़म मुख़्तसर कर दी है बज़्म-ए-ना-शकेबा ने
हुए हैं मंज़िलों के फ़ासले कम देखिए क्या हो