उर्दू शायरी · ग़ज़ल

din ho ya raat hum ko chalna hai

दिन हो या रात हम को चलना है

دن ہو یا رات ہم کو چلنا ہے

शायर: Daud Ghazi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिन हो या रात हम को चलना है
हम को चलना है शब को ढलना है

शिद्दत-ए-ग़म से लड़खड़ाते हैं
लड़खड़ा कर मगर सँभलना है

दोस्तो कारवाँ बना के चलो
रहगुज़ारों का रुख़ बदलना है

हर ग़म-ए-ज़ीस्त है क़ुबूल मगर
हर ग़म-ए-ज़ीस्त को बदलना है