उर्दू शायरी · ग़ज़ल

siskiyon hichkiyon aahon ki farawani mein

सिसकियों हिचकियों आहों की फ़रावानी में

سسکیوں ہچکیوں آہوں کی فراوانی میں

शायर: Aamir Suhail9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सिसकियों हिचकियों आहों की फ़रावानी में
उलझनें कितनी हैं इस इश्क़ की आसानी में

ये तिरे बालों का तालाब की तह को छूना
हालत-ए-ख़्वाब में या आलम-ए-उर्यानी में

बे-हिजाबाना किसी लहर का तुझ तक आना
फिर तिरे जिस्म का बह जाना घने पानी में

कहकशाओं का ग़ज़ालों का ग़ज़ल-ज़ादों का
दूर-ओ-नज़दीक से आना तिरी मेहमानी में

रात का झुकना तिरी पुश्त पे दिलदारी को
बाग़ के पेड़ों का आ जाना रजज़-ख़्वानी में

बाम-ओ-दर देखते जाते हैं खड़े सकते में
इक सितारे का तवारुद तिरी पेशानी में

मरमरीं उँगलियाँ इक दिल पे लिखें हाल-ए-हिना
फूल आवाज़ का खिल जाए पशेमानी में

चाँद मख़रूती उभारों पे शुआएँ फेंके
इस क़दर महव तुझे देख के हैरानी में

साया-ए-साबित-ओ-सय्यार के हाले में चलूँ
और जहानों में रहूँ तेरी निगहबानी में