उर्दू शायरी · ग़ज़ल

is jada-e-ushshaq ki taqdir ajab hai

इस जादा-ए-उश्शाक़ की तक़दीर अजब है

اس جادہ عشاق کی تقدیر عجب ہے

शायर: Aamir Suhail9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इस जादा-ए-उश्शाक़ की तक़दीर अजब है
मुट्ठी में जहाँ पाँव में ज़ंजीर अजब है

बे-वक़अत-ओ-कम-माया सही ख़्वाब हमारे
ख़्वाबों से अलग होने की ता'ज़ीर अजब है

मैं शे'र कहूँ और तिरे नाम पे रो दूँ
ये रंज का पैरा-ए-दिल-गीर अजब है

आँखों में बिछे सुरमई मख़मल की अदा और
महमिल में फटे होंटों की तहक़ीर अजब है

हर ईंट मिरी नज़्म को देती है दिलासा
ये कुंज-ए-ग़ज़ल सहन-ए-मज़ा मीर अजब है

दाग़ों की बहारों से मोअ'त्तर है कोई जिस्म
और इस्म पढ़े जाने में ताख़ीर अजब है

ये ख़ाक-बसर हुस्न ये महताब की टहनी
रौंदी हुई सब्ज़े की ये जागीर अजब है

नीलाए हुए सेहनों की बस्ती में है कोहराम
दरयाफ़्ता सय्यारे की तस्ख़ीर अजब है

दिल सकते के आलम से निकलता नहीं 'आमिर'
इक बात के सह जाने की तासीर अजब है