उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek wazifa hai kisi dard ka dohraya hua

इक वज़ीफ़ा है किसी दर्द का दोहराया हुआ

اک وظیفہ ہے کسی درد کا دہرایا ہوا

शायर: Aamir Suhail7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इक वज़ीफ़ा है किसी दर्द का दोहराया हुआ
जिस की ज़द में है पहाड़ों का धुआँ आया हुआ

ये तिरे इश्क़ की मीक़ात ये होनी की अदा
धूप के शीशे में इक ख़्वाब सा फैलाया हुआ

बाँध लेते हैं गिरह में उसी मंज़र की धनक
हम ने मेहमान को कुछ देर है ठहराया हुआ

ताइरो अब्र-ओ-हवा भी हैं इसी उलझन में
कैसे दो होंटों ने इक बाग़ है दहकाया हुआ

छेद हैं उम्र की पोशाक पे तन्हाई के
ख़ुशनुमा क़रियों में हूँ आप से उकताया हुआ

रात आती है तो रख देती है फाहा दिल पर
वर्ना इस दश्त का हर पेड़ है ज़ख़माया हुआ

हड्डियाँ जोड़ के तरतीब से उस ने 'आमिर'
ख़्वाब का लट्ठा है इस रूह को पहनाया हुआ