उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sikandar ke safar ki baat nikle

सिकंदर के सफ़र की बात निकले

سکندر کے سفر کی بات نکلے

शायर: Parveen Kaif6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सिकंदर के सफ़र की बात निकले
कफ़न में से हों ख़ाली हाथ निकले

वो कल की फेसबुक वो 'कैफ़'-ओ-'शेरी'
वो देखो चाँद सूरज साथ निकले

मैं निकलूँ चाँदी और सोना पहन कर
मगर मिट्टी मिरी औक़ात निकले

तवक़्क़ो ले के वो आया था लेकिन
उसी जैसे मेरे हालात निकले

जहाँ अर्थी उठाई जा रही हो
उसी कूचे से क्यों बारात निकले

सितारों का शरफ़ क्या वो तो 'परवीन'
हमारी ज़ात के ज़र्रात निकले