उर्दू शायरी · ग़ज़ल

shikasta-pa hi chalenge shikasta-pa ki taraf

शिकस्ता-पा ही चलेंगे शिकस्ता-पा की तरफ़

شکستہ پا ہی چلیں گے شکستہ پا کی طرف

शायर: Nadim Nadeem7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

शिकस्ता-पा ही चलेंगे शिकस्ता-पा की तरफ़
सो हम पलटने लगे हैं तिरी सदा की तरफ़

जिन्हें सँवरना हो सब उस के साथ हो जाएँ
भटकने वाले चलें मेरे नक़्श-ए-पा की तरफ़

ख़मोशी खींच के लाई मुझे वुजूद तलक
वुजूद खींच के लाया है मुझ को ला की तरफ़

मैं चीख़ता रहा तन्हा सवाल करता रहा
हज़ार लोग खड़े थे मगर ख़ुदा की तरफ़

वो अपनी रौ में मगन है हम अपने ध्यान में गुम
हवा हमारी तरफ़ है न हम हवा की तरफ़

वो मुझ को पार लगाने की ज़िद पे अटका है
और हँस के देख रहा हूँ मैं ना-ख़ुदा की तरफ़

मैं जंगलों की तरफ़ से सदा लगाता था
ख़िज़ाँ की रुत में बहारों के देवता की तरफ़