उर्दू शायरी · ग़ज़ल

shahron mein nachta hua jangal hai aur main

शहरों में नाचता हुआ जंगल है और मैं

شہروں میں ناچتا ہوا جنگل ہے اور میں

शायर: R P Shokh4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

शहरों में नाचता हुआ जंगल है और मैं
सदियों के बाद भी वही क़ातिल है और मैं

पाँव की गर्द हो चुकीं कितनी मसाफ़तें
अब भी मगर वो दूरी-ए-मंज़िल है और मैं

समझूँ अब और क्या तुझे काफ़िर-अदा निज़ाम
बरसों से एक वादा-ए-बातिल है और मैं

पूछो पसंद तो है वही चश्म-ए-नीम-बाज़
वैसे हर एक गाम पे मक़्तल है और मैं