उर्दू शायरी · ग़ज़ल

shabdon ke kohna ban ki kaDi dhup sah sake

शब्दों के कोहना बन की कड़ी धूप सह सके

شبدوں کے کہنہ بن کی کڑی دھوپ سہہ سکے

शायर: Saba Ikram3 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

शब्दों के कोहना बन की कड़ी धूप सह सके
तब जा के कोई एक नई बात कह सके

एहसास की सदाओं की बेड़ी थी पाँव में
आज़ाद हो के भी न हम आज़ाद रह सके

उस के बदन से रात 'सबा' लम्स की ज़बाँ
वो बात कह गई जो कभी हम न कह सके