उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sau tarah ke uThne wale waswase hain masale

सौ तरह के उठने वाले वसवसे हैं मसअले

سو طرح کے اٹھنے والے وسوسے ہیں مسئلے

शायर: Ushba Tabeer7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सौ तरह के उठने वाले वसवसे हैं मसअले
आप के जो मसअले हैं मसअले हैं मसअले

दुनिया-दारी का अगर हम मसअला सुलझा भी लें
दिल की दुनिया के बहुत उलझे हुए हैं मसअले

जब से तुम को मैं ने अपना कह दिया है बरमला
हाए मुझ को फन उठा कर डस रहे हैं मसअले

वस्ल में तो ख़ैर थोड़ा जी बहल जाता है पर
हिज्र ख़ुद इक मसअला है हिज्र के हैं मसअले

दिल के सारे मसअले तो हल नहीं होते कभी
कुछ पुराने मसअले हैं कुछ नए हैं मसअले

हम ने तुझ को छोड़ कर देखा है लेकिन ये हुआ
अब तिरी यादों के दिल पर उठ गए हैं मसअले

आज माँ की गोद में सर मैं ने 'उश्बा' रख दिया
आज मुझ से ख़ौफ़ खाते जा रहे हैं मसअले