उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bhale logon mein hun to main bhali hun

भले लोगों में हूँ तो मैं भली हूँ

بھلے لوگوں میں ہوں تو میں بھلی ہوں

शायर: Ushba Tabeer9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

भले लोगों में हूँ तो मैं भली हूँ
अगरचे मैं ज़रा सी सर-फिरी हूँ

बदन संदल सा होता जा रहा है
तिरी ख़ुशबू में जानाँ ढल रही हूँ

मोहब्बत के समुंदर में उतर कर
तिरी उल्फ़त के गौहर चुन चुकी हूँ

मिरी परवाज़ है तेरी बदौलत
मैं चाहत के उफ़ुक़ पर उड़ रही हूँ

फिसल सकती हूँ तेरे हाथ से मैं
मुझे कस कर पकड़ना जल-परी हूँ

वफ़ाओं के शजर से टूट कर मैं
तिरे दामन में आ कर गिर पड़ी हूँ

गुलाबों ने मिरी सुर्ख़ी चुरा ली
चमन में हर तरफ़ मैं खिल रही हूँ

मिरी ख़ुशबू चमेली ले उड़ी है
हवा में इत्र बन कर घूमती हूँ

अगरचे नर्म-ओ-नाज़ुक हूँ मैं 'उश्बा'
तबीअत की ज़रा सी मंचली हूँ