उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kahun ye kaise ki dil ko tera KHayal nahin

कहूँ ये कैसे कि दिल को तिरा ख़याल नहीं

کہوں یہ کیسے کہ دل کو ترا خیال نہیں

शायर: Ushba Tabeer7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कहूँ ये कैसे कि दिल को तिरा ख़याल नहीं
ये बात और कि ज़ाहिर हुआ मलाल नहीं

तड़प रहा है अभी तक ये दिल उसी के लिए
वो मेरा इश्क़ है और इश्क़ को ज़वाल नहीं

तमाम उम्र सिसकते हुए ही गुज़रेगी
मिरे नसीब में जानाँ तिरा विसाल नहीं

सभी जवाब मुझे ख़ामुशी में मिलते हैं
तुम्हारे तर्ज़-ए-तकल्लुम की भी मिसाल नहीं

तो क्या हुआ जो अगर लुट गया भरम मेरा
कि एक-तरफ़ा मोहब्बत में कुछ कमाल नहीं

सितम वो लाख करे साथ मेरे हक़ है उसे
मिरे लबों पे शिकायत नहीं सवाल नहीं

किनारा इश्क़ से उस के मुहाल है 'उश्बा'
वो जान-ए-जाँ है मिरी जान का वबाल नहीं