उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sada aansu bahane se kisi ko kuchh nahin milta

सदा आँसू बहाने से किसी को कुछ नहीं मिलता

سدا آنسو بہانے سے کسی کو کچھ نہیں ملتا

शायर: Iftikhar Raghib5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सदा आँसू बहाने से किसी को कुछ नहीं मिलता
कि रोने गिड़गिड़ाने से किसी को कुछ नहीं मिलता

किसी का कुछ नहीं जाता किसी से हँस के मिलने से
अजी यूँ मुँह बनाने से किसी को कुछ नहीं मिलता

अगर ग़ैरत है ज़िंदा तो वसाइल कीजिए पैदा
हमेशा दुम हिलाने से किसी को कुछ नहीं मिलता

न हो तदबीर तो तक़दीर भी हामी नहीं होती
ख़ुदा के कार-ख़ाने से किसी को कुछ नहीं मिलता

दरख़्तों पर इन्हें 'राग़िब' हमेशा चहचहाने दो
परिंदों को उड़ाने से किसी को कुछ नहीं मिलता