उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sab rang mein us gul ki mere shan hai maujud

सब रंग में उस गुल की मिरे शान है मौजूद

سب رنگ میں اس گل کی مرے شان ہے موجود

शायर: Bahadur Shah Zafar7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सब रंग में उस गुल की मिरे शान है मौजूद
ग़ाफ़िल तू ज़रा देख वो हर आन है मौजूद

हर तार का दामन के मिरे कर के तबर्रुक
सर-बस्ता हर इक ख़ार-ए-बयाबान है मौजूद

उर्यानी-ए-तन है ये ब-अज़-ख़िलअत-ए-शाही
हम को ये तिरे इश्क़ में सामान है मौजूद

किस तरह लगावे कोई दामाँ को तिरे हाथ
होने को तू अब दस्त-ओ-गरेबान है मौजूद

लेता ही रहा रात तिरे रुख़ की बलाएँ
तू पूछ ले ये ज़ुल्फ़-ए-परेशान है मौजूद

तुम चश्म-ए-हक़ीक़त से अगर आप को देखो
आईना-ए-हक़ में दिल-ए-इंसान है मौजूद

कहता है 'ज़फ़र' हैं ये सुख़न आगे सभों के
जो कोई यहाँ साहिब-ए-इरफ़ान है मौजूद