उर्दू शायरी · ग़ज़ल

saya kiye hue tha jo baadal nahin raha

साया किए हुए था जो बादल नहीं रहा

سایہ کیے ہوئے تھا جو بادل نہیں رہا

शायर: Obaidurrahman Niyazi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

साया किए हुए था जो बादल नहीं रहा
आफ़ात का ये मेहर मगर ढल नहीं रहा

सर पर थी उस की छाँव तो मौजूद थे हवास
पगला गए हैं हम कि वो आँचल नहीं रहा

जीवन की शाहराह को रौशन किए हुए
इक ही तो क़ुमक़ुमा था जो अब जल नहीं रहा

इक ख़ूब-रू परिंदा बड़ी दूर जा बसा
अब ख़्वाहिशों का बाग़ मुकम्मल नहीं रहा

ठहरे हुए थे हम तो चले जा रहा था वक़्त
जब साथ चल दिए हैं तो अब चल नहीं रहा

देखा तो उस तरफ़ कोई मौजूद ही न था
जब दरमियान ख़ौफ़ का दलदल नहीं रहा

मेरे तख़य्युलात ने जादू सा कर दिया
वो सामने न हो के भी ओझल नहीं रहा