उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek hasrat mein Dhal ke Dasti hai

एक हसरत में ढल के डसती है

ایک حسرت میں ڈھل کے ڈستی ہے

शायर: Obaidurrahman Niyazi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

एक हसरत में ढल के डसती है
अब्र से बेकली बरसती है

एक ख़ाका सा मेरे ध्यान में है
एक ख़्वाहिश सी दिल में बस्ती है

रात में भी न हो सका रौशन
दिल-मोहल्ले में तंग-दस्ती है

घर के दीवार-ओ-दर ही मुख़्लिस हैं
बाक़ी दुनिया तो मुझ पे हँसती है

क्यों यहाँ ढूँडते हो मुस्कानें
दहर तो इक उदास बस्ती है

हर किसी को भला हो क्यों हासिल
ग़म की सौग़ात कोई सस्ती है

जब भी मैं महफ़िलों में होता हूँ
रूह तन्हाई को तरसती है