उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kisi ke panw ki ragaD se aag si lagi to thi kidhar gai

किसी के पाँव की रगड़ से आग सी लगी तो थी किधर गई

کسی کے پاؤں کی رگڑ سے آگ سی لگی تو تھی کدھر گئی

शायर: Obaidurrahman Niyazi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

किसी के पाँव की रगड़ से आग सी लगी तो थी किधर गई
नज़र तो आई थी मुझे ज़रा सी देर रौशनी किधर गई

मैं उस के लफ़्ज़ लफ़्ज़ की बनावटों में गुम था जब हवा चली
जो मेरे दिल की मेज़ पर किताब थी खुली हुई किधर गई

बस एक मोड़ क्या कटा कि वापसी का रास्ता ही खो गया
मैं ढूँड ढूँड थक गया यहीं तो थी मिरी गली किधर गई

मैं भूल आया हूँ कहीं कि छीन ले गया कोई ख़बर नहीं
जो मैं ने रब से पाई थी मिरे नसीब की ख़ुशी किधर गई

उदासियों के दश्त ने थका दिया बुझा दिया सुला दिया
वो मेरी आँख में जो थी समुंदरों सी ताज़गी किधर गई